Shayad…

प्रयास

Posted by: abmantra on: October 11, 2008

बहने दो जिंदगी यूँ ही,
ना सोचो इस रात की सुबह नहीं,
शायद यह परीक्षा धैर्य की,
शायद हो आगे नयी राहे कहीं…

आँखों में आंसू जो आज,
कल राहों के जुगनू बनेंगे,
आगे बढ़ते ये छोटे से कदम,
कल हमारा सामर्थ्य होंगे
धरा को सुन्दर बनाता,
हमारा छोटा सा प्रयास यही…

उगते सूर्य की भक्ति करता,
माना सारा विश्व है,
पर सपनो के हारे को तो,
संभाले स्वयं पिता शिव हैं
सपने देखो, निर्भय बनो,
जीवन यूँ ही मिट जाने का नाम नहीं…

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2 Responses to "प्रयास"

सुबह कल तो होनी ही है,
सूर्योदय कल निश्चित होगा.

रवि की किरणें सदा रहीं
कल भी दीप्तिमान होगा

प्रयास निरंतर बना रहे
मिटने से हासिल कुछ होगा?

संतोष

आपने बहुत अच्छा लिखा है मेरे दोस्त!

आपकी रचना बहुत बढिया! बहुत बहुत धन्यवाद
ज़रा मेरी सुनेंगे ? आज ईश्वर को मानते तो सब हैं परन्तु पहचानते बहुत कम लोग हैं हमारी रचना क्यों हुई ? हम धरती पर क्यों आए ? हमें कहाँ जाना है ? क्या सब धर्म बराबर है ? क्या ईश्वर अवतार लेता है ? मुक्ति कहाँ है ? कल्कि अवतार कौन हैं ? हमारा वास्तविक धर्म क्या था ? इत्यादि प्रश्नों का उत्तर जानने के इच्छुक हैं तो इस ब्लौग का अवश्य अध्ययन करें। http://safat.ipcblogger.com/blog धन्यवाद

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